माँ दुर्गा जी के दिव्य श्लोक और मंत्र

माँ दुर्गा जी के दिव्य श्लोक और मंत्र

सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्तिभूते सनातनि।

गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे सनातनी देवी! आप ही संसार की सृष्टि, पालन और संहार की मूल शक्ति हैं। आप समस्त गुणों की आश्रय और गुणमयी हैं। हे नारायणी! आपको बार-बार प्रणाम है।

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा

रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्।

त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां

त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! प्रसन्न होने पर आप समस्त रोगों का नाश कर देती हैं और रुष्ट होने पर सभी मनोवांछित कामनाओं को नष्ट कर देती हैं। जो आपकी शरण में आते हैं, उन पर विपत्ति नहीं आती; बल्कि वे स्वयं दूसरों को आश्रय देने योग्य बन जाते हैं।

दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तोः

स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।

दारिद्र्यदुःखभयहारिणि का त्वदन्या

सर्वोपकारकरणाय सदार्द्रचित्ता॥

हिंदी भावार्थ:

हे माँ दुर्गा! संकट में आपका स्मरण करने पर आप सभी प्राणियों के भय को दूर करती हैं और शांत अवस्था में स्मरण करने पर शुभ बुद्धि प्रदान करती हैं। दरिद्रता, दुःख और भय को दूर करने वाली तथा सबका उपकार करने के लिए सदा करुणामयी रहने वाली आपके समान दूसरी कौन है?

सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।

भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! आप समस्त स्वरूपों में विद्यमान, सबकी अधीश्वरी और सभी शक्तियों से सम्पन्न हैं। हे माँ दुर्गा! हमें सभी प्रकार के भय से बचाइए। आपको नमस्कार है।

सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।

शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे माँ नारायणी! आप समस्त मंगलों में परम मंगलमयी, कल्याणस्वरूपा और सभी पुरुषार्थों को सिद्ध करने वाली हैं। आप शरण देने वाली, त्रिनेत्रधारिणी गौरी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।

एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥

हिंदी भावार्थ:

हे तीनों लोकों की अधीश्वरी! आप समस्त बाधाओं को शांत करने वाली हैं। इसी प्रकार हमारे विरोधियों और समस्त विघ्न-बाधाओं का भी विनाश कीजिए।

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।

मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

हिंदी भावार्थ:

माँ की कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और संतान-सुख से सम्पन्न होगा—इसमें कोई संशय नहीं है।

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद

प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं

त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

हिंदी भावार्थ:

हे शरणागतों के दुःखों को हरने वाली देवी! प्रसन्न होइए। हे सम्पूर्ण जगत की माता! हम पर कृपा कीजिए। हे विश्वेश्वरी! संसार की रक्षा कीजिए, क्योंकि आप ही समस्त चर और अचर जगत की अधीश्वरी हैं।

आधारभूता जगतस्त्वमेका

महीस्वरूपेण यतः स्थितासि।

अपां स्वरूपस्थितया त्वयैत-

दाप्यायते कृत्स्नमलङ्घ्यवीर्ये॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! आप पृथ्वी के रूप में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत की एकमात्र आधार हैं। जल के रूप में स्थित होकर आप इस सम्पूर्ण संसार का पोषण करती हैं। हे असीम सामर्थ्य वाली देवी! आपकी शक्ति का उल्लंघन कोई नहीं कर सकता।

विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः

स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।

त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्

का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! संसार की समस्त विद्याएँ आपके ही विभिन्न स्वरूप हैं और जगत की समस्त स्त्रियाँ भी आपकी ही अभिव्यक्तियाँ हैं। हे माँ! आपने अकेले ही सम्पूर्ण विश्व को व्याप्त कर रखा है; अतः आपकी पूर्ण स्तुति कर पाना वाणी की सामर्थ्य से परे है।

हंसयुक्तविमानस्थे ब्रह्माणीरूपधारिणि।

कौशाम्भःक्षरिके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप हंसयुक्त विमान पर विराजमान होकर ब्रह्माणी का स्वरूप धारण करती हैं और पवित्र जल का छिड़काव करने वाली देवी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

मयूरकुक्कुटवृते महाशक्तिधरेऽनघे।

कौमारीरूपसंस्थाने नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे निष्पाप और पवित्र देवी! आप मयूर तथा कुक्कुट से घिरी हुई, महान शक्ति धारण करने वाली और कौमारी स्वरूप में स्थित हैं। हे नारायणी! आपको बार-बार प्रणाम है।

शङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे।

प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग धनुष जैसे परम दिव्य आयुधों को धारण करने वाली वैष्णवी स्वरूपा हैं। हे देवी! हम पर प्रसन्न हों। आपको नमस्कार है।

गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।

वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप भयंकर महाचक्र धारण करती हैं और वराह स्वरूप में अपनी दंष्ट्रा पर पृथ्वी को उठाने वाली कल्याणमयी देवी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।

चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आपका मुख विकराल दंष्ट्राओं से युक्त है और आप मुण्डों की माला से सुशोभित हैं। हे मुण्डासुर का संहार करने वाली माँ चामुण्डा! आपको बार-बार प्रणाम है।

लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टि स्वधे ध्रुवे।

महारात्रि महामाये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप लक्ष्मी, लज्जा, महाविद्या, श्रद्धा, पुष्टि, स्वधा और ध्रुवा स्वरूपा हैं। आप ही महारात्रि और महामाया हैं। हे जगदम्बा! आपको बार-बार प्रणाम है।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! आप सबके दुःखों को हरने वाली हैं। हे माँ दुर्गा! आप कठिनाइयों और दुर्गम संसार-सागर से पार लगाने वाली तथा समस्त कार्यों की मूल शक्ति हैं। आपको नमस्कार है।

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिंदी भावार्थ:

हे माँ चण्डिका! आप भक्तिपूर्वक नमन करने वालों के पाप, दुःख और संकटों को दूर करने वाली हैं। हमें उत्तम स्वरूप, विजय और यश प्रदान करें तथा द्वेष और विरोध का नाश करें।

शङ्खचक्रगदाशार्ङ्गगृहीतपरमायुधे।

प्रसीद वैष्णवीरूपे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप शंख, चक्र, गदा और शार्ङ्ग धनुष जैसे दिव्य आयुध धारण करने वाली वैष्णवी स्वरूपा हैं। हे देवी! हम पर प्रसन्न हों, आपको बार-बार प्रणाम है।

गृहीतोग्रमहाचक्रे दंष्ट्रोद्धृतवसुन्धरे।

वराहरूपिणि शिवे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप अपने हाथ में भयंकर महाचक्र धारण करती हैं और वराह स्वरूप में अपनी दाढ़ों पर पृथ्वी को उठाने वाली कल्याणमयी देवी हैं। आपको नमस्कार है।

नृसिंहरूपेणोग्रेण हन्तुं दैत्यान् कृतोद्यमे।

त्रैलोक्यत्राणसहिते नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप उग्र नृसिंह स्वरूप धारण करके दैत्यों का संहार करने के लिए तत्पर रहती हैं और तीनों लोकों की रक्षा करती हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

किरीटिनि महावज्रे सहस्रनयनोज्ज्वले।

वृत्रप्राणहरे चैन्द्रि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप मुकुट धारण करने वाली, महान वज्र से सुशोभित, सहस्र नेत्रों के तेज से प्रकाशित तथा वृत्रासुर के प्राणों का हरण करने वाली इन्द्राणी स्वरूपा हैं। आपको नमस्कार है।

शिवदूतीस्वरूपेण हतदैत्यमहाबले।

घोररूपे महारावे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! शिवदूती का स्वरूप धारण करके आपने महाबली दैत्यों का संहार किया। आप घोर स्वरूप और प्रचण्ड नाद करने वाली देवी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

दंष्ट्राकरालवदने शिरोमालाविभूषणे।

चामुण्डे मुण्डमथने नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आपका मुख विकराल दाढ़ों से युक्त है, आप मुण्डों की माला से सुशोभित हैं और मुण्ड नामक असुर का संहार करने वाली चामुण्डा हैं। आपको नमस्कार है।

लक्ष्मि लज्जे महाविद्ये श्रद्धे पुष्टि स्वधे ध्रुवे।

महारात्रि महामाये नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप लक्ष्मी, लज्जा, महाविद्या, श्रद्धा, पुष्टि, स्वधा और ध्रुवा स्वरूपा हैं। आप महारात्रि तथा महामाया भी हैं। हे जगदम्बा! आपको बार-बार प्रणाम है।

मेधे सरस्वति वरे भूति बाभ्रवि तामसि।

नियते त्वं प्रसीदेशे नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप मेधा, सरस्वती, श्रेष्ठ वर प्रदान करने वाली, ऐश्वर्यस्वरूपा, शक्ति तथा नियति के रूप में विद्यमान हैं। हे जगदीश्वरी! हम पर प्रसन्न हों, आपको नमस्कार है।

सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हृदि संस्थिते।

स्वर्गापवर्गदे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप सभी प्राणियों के हृदय में बुद्धि के रूप में स्थित हैं तथा स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली देवी हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते।

दुर्गायै दुर्गपारायै सारायै सर्वकारिण्यै॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! आप सबके दुःखों को हरने वाली हैं। हे दुर्गा! आप कठिनाइयों और दुर्गम संसार-सागर से पार लगाने वाली तथा समस्त कार्यों की मूल शक्ति हैं। आपको नमस्कार है।

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।

रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥

हिंदी भावार्थ:

हे चण्डिका! आप भक्तिपूर्वक नमन करने वालों के पाप और दुःखों को दूर करती हैं। हमें उत्तम स्वरूप, विजय और यश प्रदान करें तथा हमारे द्वेष और बाधाओं का नाश करें।

सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि।

एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनाशनम्॥

हिंदी भावार्थ:

हे तीनों लोकों की अधीश्वरी माँ! आप समस्त बाधाओं को शांत करने वाली हैं। इसी प्रकार हमारे सभी विघ्नों और शत्रुओं का भी विनाश कीजिए।

सर्वाबाधाविनिर्मुक्तो धनधान्यसुतान्वितः।

मनुष्यो मत्प्रसादेन भविष्यति न संशयः॥

हिंदी भावार्थ:

माँ की कृपा से मनुष्य सभी बाधाओं से मुक्त होकर धन, धान्य और संतान-सुख से सम्पन्न होता है—इसमें कोई संशय नहीं है।

करोतु सा नः शुभहेतुरीश्वरी

शुभानि भद्राण्यभिहन्तु चापदः॥

हिंदी भावार्थ:

वे जगदम्बा ईश्वरी हमारे लिए शुभ और कल्याणकारी कार्य करें तथा हमारी समस्त विपत्तियों और संकटों का नाश करें।

देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद

प्रसीद मातर्जगतोऽखिलस्य।

प्रसीद विश्वेश्वरि पाहि विश्वं

त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य॥

हिंदी भावार्थ:

हे शरणागतों के दुःख हरने वाली देवी! प्रसन्न होइए। हे सम्पूर्ण जगत की माता! हम पर कृपा कीजिए। हे विश्वेश्वरी! इस संसार की रक्षा कीजिए, क्योंकि आप ही समस्त चर और अचर जगत की अधीश्वरी हैं।

आधारभूता जगतस्त्वमेका

महीस्वरूपेण यतः स्थितासि।

अपां स्वरूपस्थितया त्वयैत-

दाप्यायते कृत्स्नमलङ्घ्यवीर्ये॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! आप ही पृथ्वी के रूप में स्थित होकर सम्पूर्ण जगत की एकमात्र आधार हैं। जल के रूप में भी आप ही इस सम्पूर्ण संसार को तृप्त और पोषित करती हैं। आपकी शक्ति और सामर्थ्य असीम है।

विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः

स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु।

त्वयैकया पूरितमम्बयैतत्

का ते स्तुतिः स्तव्यपरापरोक्तिः॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! संसार की समस्त विद्याएँ आपके ही विभिन्न स्वरूप हैं और संसार की समस्त स्त्रियाँ भी आपकी ही अभिव्यक्तियाँ हैं। हे माँ! आपने अकेले ही सम्पूर्ण विश्व को व्याप्त कर रखा है। फिर आपकी पूर्ण स्तुति भला कौन कर सकता है?

सर्वभूता यदा देवी स्वर्गमुक्तिप्रदायिनी।

त्वं स्तुता स्तुतये का वा भवन्तु परमोक्तयः॥

हिंदी भावार्थ:

हे देवी! जब आप ही समस्त प्राणियों में विराजमान होकर स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करने वाली हैं, तब आपकी स्तुति के लिए कौन-से शब्द पर्याप्त हो सकते हैं? आपकी महिमा वाणी से परे है।

कलाकाष्ठादिरूपेण परिणामप्रदायिनि।

विश्वस्योपरतौ शक्ते नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप कला, काष्ठा आदि काल के विभिन्न रूपों में स्थित होकर संसार में परिवर्तन लाती हैं और समय आने पर विश्व के लय की शक्ति बनती हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

हंसयुक्तविमानस्थे ब्रह्माणीरूपधारिणि।

कौशाम्भःक्षरिके देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप हंसयुक्त विमान पर विराजमान होकर ब्रह्माणी का स्वरूप धारण करती हैं और पवित्र जल का छिड़काव करने वाली देवी हैं। आपको नमस्कार है।

त्रिशूलचन्द्राहिधरे महावृषभवाहिनि।

माहेश्वरीस्वरूपेण नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे नारायणी! आप त्रिशूल, चंद्रमा और सर्प धारण करती हैं, विशाल वृषभ पर सवार रहती हैं और माहेश्वरी के रूप में विराजमान हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।

मयूरकुक्कुटवृते महाशक्तिधरेऽनघे।

कौमारीरूपसंस्थाने नारायणि नमोऽस्तु ते॥

हिंदी भावार्थ:

हे निष्पाप एवं पवित्र देवी नारायणी! आप मयूर और कुक्कुट से घिरी हुई, महान शक्ति धारण करने वाली तथा कौमारी स्वरूप में स्थित हैं। आपको बार-बार प्रणाम है।